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देवेंद्र प्रताप सिंह ने ऊटी में SC-ST योजनाओं की समीक्षा की, समावेशी विकास पर जोर

 

Devendra Pratap Singh

रायगढ़, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के उत्थान से संबंधित संसदीय समिति के अध्ययन दौरे में भाग लिया। ऊटी में आयोजित इस बैठक में समिति ने इन समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों की गहन समीक्षा की।

बैठक के दौरान अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण से जुड़ी केंद्र और राज्य सरकारों की प्रमुख योजनाओं की प्रगति, उनके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन तथा प्राप्त परिणामों पर विस्तार से चर्चा हुई।

योजनाओं की प्रगति और चुनौतियों पर चर्चा

संसदीय समिति ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में यह भी जिला गया कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ कैसे और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए तथा क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान योजनाओं की पहुंच बढ़ाने, उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए व्यावहारिक सुझावों पर भी मंथन हुआ।

समावेशी विकास पर सांसद का बयान

सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को सामाजिक न्याय, समान अवसर तथा समावेशी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास की प्रक्रिया में पूरी भागीदारी दिलाना तथा उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कौशल विकास की योजनाओं के माध्यम से इन समुदायों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने और अंतिम पात्र व्यक्ति तक लाभ सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

समिति की बैठक में उपस्थिति

बैठक की अध्यक्षता संसदीय समिति के अध्यक्ष फग्गन सिंह कुलस्ते ने की। इसमें समिति के अन्य सदस्य सांसद और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक में प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों के समग्र विकास को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने पर भी विचार किया गया।

यह अध्ययन दौर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में सरकारी प्रयासों को और मजबूत बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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